गुमराह ऋत्विक., August 4, 2024 हमने अपनी खामियों की गांठ को वक़्त से बंधना छोड़ दिया, वक़्त की आढ में खुद को गुमराह करना छोड़ दिया! Poems Quotes & Shayari
Poems एक कहानी मेरी भी August 5, 2025August 18, 2025 दुनियां के इन अनगिनत कहानियों में, एक कहानी मेरी भी, थोड़ी कच्ची, थोड़ी बिगड़ती, पर… Read More
Poems ज़िद July 29, 2024August 4, 2024 मेरी इस जीतने की जिद मेंकहीं तेरी हार ना हो, मेरी इस चाहत को पाने… Read More
Poems मिट्टी का महल August 5, 2025August 10, 2025 कभी रेत पे मैंने एक महल बनाया था, सपनों का, उम्मीदों का, बहुत सजाया था।… Read More