ठोकरें ऋत्विक., August 5, 2025August 10, 2025 सौ ठोकरें खाके दुनिया से, हम ने भी कुछ सीखा है, अब मंजूर हैं हमें हमारी गुस्ताखीयो से, दिल दूसरों का भी दुखा है। Poems Quotes & Shayari
Poems ना ख्वाब है ना सच्चाई…. !!! July 29, 2024August 4, 2024 ना ख्वाब है ना सच्चाई i…है तो बस एक लक्ष्य ! ना धूप है ना… Read More
Poems चाय का ठेला July 28, 2024July 29, 2024 कहने को वह इक सिर्फ चाय का ठेला था,बचपन में हमारे सपनों का वहाँ लगा… Read More
Poems तेरी बाहों में जगह मिले तो खूब ! July 29, 2024August 4, 2024 तेरी बाहों में जगह मिले तो खूब ! तेरी बाहों में जगह मिले तो खूबमन… Read More