Poems जन्नत August 5, 2025August 10, 2025 हा जन्नत ही तो हूं मैं। अगर इस ढलती सांज के नज़ारे लुट सको तो… Read More
Poems रंगीन गुब्बारे February 7, 2026 एक ओर, आलीशान सवारी में बैठ, नन्हीं-सी जान की आँख, बूंद-बूंद पिघल गई, बस ज़िद… Read More
Poems पिता July 29, 2024 माँ है मेरी ढालतो बाप पूरी फौज हैना जाने कितनी जंगे लड़करकरवायी मेरी मौज है… Read More