Poems जन्नत August 5, 2025August 10, 2025 हा जन्नत ही तो हूं मैं। अगर इस ढलती सांज के नज़ारे लुट सको तो… Read More
Poems चाय का ठेला July 28, 2024July 29, 2024 कहने को वह इक सिर्फ चाय का ठेला था,बचपन में हमारे सपनों का वहाँ लगा… Read More
Poems वक्त की खता August 4, 2024 किस्मत की दबा के रेखा हाथ में वक्त को यूं सता नहीं, वक्त की कोई… Read More