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ink to echo
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From the quiet corners of the mind.

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From the quiet corners of the mind.

Poems

Poems
ऋत्विक.

कल मेरे जाने के बाद

कल मेरे जाने के बाद यूंही किसी शाम  चाय की चुस्कियां लेते हुए किसी रोज़

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August 5, 2025
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ऋत्विक.

ठोकरें

सौ ठोकरें खाके दुनिया से, हम ने भी कुछ सीखा है, अब मंजूर हैं हमें

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August 5, 2025
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ऋत्विक.

योद्धा 

न तीर न कमान है, टूटा हुआ सम्मान है, जिम्मेदारियों की जंजीर है, और बस

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August 5, 2025
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ऋत्विक.

एक कहानी मेरी भी

दुनियां के इन अनगिनत कहानियों में, एक कहानी मेरी भी, थोड़ी कच्ची, थोड़ी बिगड़ती, पर

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August 5, 2025
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ऋत्विक.

यह पल

यह पल जो गुजर रहा है, वह सिर्फ वक्त नहीं, एक मुक्कमल ज़िंदगी है। यह

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August 5, 2025
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ऋत्विक.

जन्नत

हा जन्नत ही तो हूं मैं। अगर इस ढलती सांज के नज़ारे लुट सको  तो

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August 5, 2025
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ऋत्विक.

बारिश

इस बारिश के इतने गुण भी न गाओ ये बारिश भी बड़ा भेदभाव करती है!

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August 5, 2025
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ऋत्विक.

मिट्टी का महल

कभी रेत पे मैंने एक महल बनाया था, सपनों का, उम्मीदों का, बहुत सजाया था।

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August 5, 2025
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ऋत्विक.

तो बेहतर!

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September 23, 2024
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