Papa ऋत्विक., August 18, 2025 जिस नाम को समझ ने में मेरी आधी उमर गुजर गई, चाहते हैं लोग, उस नाम की ज़िम्मेदारियों को मैं कुछ महीनो में समझ लूं। Poems Quotes & Shayari
Poems एक कहानी मेरी भी August 5, 2025August 18, 2025 दुनियां के इन अनगिनत कहानियों में, एक कहानी मेरी भी, थोड़ी कच्ची, थोड़ी बिगड़ती, पर… Read More
Poems गुमराह August 4, 2024 हमने अपनी खामियों की गांठ को वक़्त से बंधना छोड़ दिया, वक़्त की आढ में… Read More
Poems ना ख्वाब है ना सच्चाई…. !!! July 29, 2024August 4, 2024 ना ख्वाब है ना सच्चाई i…है तो बस एक लक्ष्य ! ना धूप है ना… Read More